Kuber Ji Ki Aarti

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जानिए कुबेर देवता के बारे में – Kuber Ji Ki Aarti

सनातन धर्म के अनुसार कुबेर देवता को धन का स्वामी माना जाता है। ऐसा कहा भी जाता है, कि कुबेर जी को यक्षों का राजा व भगवान शिव का द्वारपाल नियुक्त किया गया है। कुबेर जी को भगवान शिव का परम भक्त भी कहा गया है। आपको बता दें कि भगवान शिव की कृपा के कारण ही उन्हें यक्षों का राजा नियुक्त किया गया था, और तब से उन्हें सुख-सम्पति, यश, वैभव प्रदान करने वाला देवता भी माना जाता है। ऐसा माना भी जाता है कि कुबेर देवता सभी देवताओं के कोषाध्यक्ष भी हैं। इसी के साथ कुबेर जी उत्तर दिशा के स्वामी व दिकपाल के रूप में भी जाने जाते हैं। कुबेर देवता जी की कृपा पाने के लिए भक्त उनकी तमाम तरह से पूजा-पाठ करते है, उनके मंदिर जाते हैं। ताकि उन्हें भी कुबेर जी की तरह सुख-सम्पति, यश, वैभव प्रदान हो।

भगवान श्री गणेश और धन के देवता कुबेर की कहानी

एक बार कुबेर देवता को लगने लगा कि तीनों लोकों में सबसे ज्यादा धन उन्ही के पास है और उन्हें इस बात पर घमंड होने लगा। अपने धन का दिखावा करने के लिए एक दिन उन्होंने ने महाभोज का आयोजन किया। कुबेर देवता ने इस महाभोज में सभी समस्त देवतागण को अतिथि के तौर पर बुलाया। महाभोज के इस कार्यक्रम का न्योता लेकर वो कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के पास भी गए और उन्हें विशेष अतिथि के रूप में आने का न्योता दिया। भगवान शिव ने कुबेर जी के मन में चल रही उस भावना को पढ़ लिया, और सही राह पर लाने के लिए सही पाठ पढ़ाने का सोचा। इसलिए भगवान शिव ने कुबेर जी का न्योता तो स्वीकार कर लिया। लेकिन उनसे कहा कि वह किसी कारणवश महाभोज में नहीं आ पाएंगे, किंतु उनकी जगह उनके पुत्र भगवान गणेश वहां चले जायेंगे। कुबेर जी ने भगवान शिव कि इस इच्छा को स्वीकार कर दिया और वहा से खुशी-खुशी चले गए। महाभोज के दिन भगवान गणेश के साथ-साथ सभी देवतागण भी कुबेर जी के यहाँ पहुंच गए। जैसे ही भोजन की शुरुआत हुई भगवान गणेश ने सारा भोजन खत्म कर दिया। जब कुबेर जी ने बाकी मेहमानों के लिए फिर से भोजन बनवाया, तो भगवान गणेश ने फिर से सारा भोजन खा लिया। कुबेर जी के यहां सारा भोजन समाप्त हो गया था, तो उन्होंने भगवान गणेश को थोड़ी देर रुकने की विनती की जिस पर भगवान गणेश ने उनसे कहा अगर उन्होंने और भोजन नहीं दिया तो वह उनके महल की सभी चीज़ों को खा जायँगे। यह सुनते ही कुबेर जी घबरा गए और उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया। और उन्होंने तुरंत भगवान गणेश से अपनी भूल की माफी मांग ली।

 

जानिए कुबेर मंत्र की महिमा

कुबेर जी तरह सुख-समृद्धि पाने के लिए भक्तों के लिए कुबेर जी का एक खास मंत्र है। इस मंत्र के नियमानुसार उच्चारण से भक्तों पर कुबेर जी की कृपा पड़ती है। खासकर धन प्राप्ति की इच्छा रखने वाले साधकों के लिए इस मंत्र को अमोघ माना जाता है। आपको बता दें कि कुबेर जी का यह मंत्र हमने नीचे दिया गया है। इस मंत्र को निरंतर जप करने से इसका प्रभाव देखने को मिलता है।

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये।

धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।

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Kuber Ji Ki Aarti/ कुबेर जी की आरती

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे ।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे ।
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे ।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे ।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने ।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

बल बुद्धि विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े ।
अपने भक्त जनों के,
सारे काम संवारे ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

मुकुट मणी की शोभा,
मोतियन हार गले,
स्वामी मोतियन हार गले ।
अगर कपूर की बाती,
घी की जोत जले ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

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